विद्यालय बंद, शराब के ठेके चालू – भाजपा की शिक्षा विरोधी नीति के खिलाफ कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन

हरदोई में बीएसए कार्यालय पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं का घेराव, सरकार को चेतावनी


शिक्षा बनाम सत्ता की प्राथमिकताएँ – हरदोई से उठी जोरदार आवाज

उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। योगी सरकार द्वारा 5,000 से अधिक प्राथमिक और जूनियर स्कूलों के बंद किए जाने के निर्णय ने विपक्ष के गुस्से को भड़का दिया है। इसी क्रम में बुधवार को कांग्रेस पार्टी ने हरदोई में जोरदार प्रदर्शन कर सरकार की "शिक्षा विरोधी नीति" पर खुला हमला बोला।

गांधी भवन से शुरू हुआ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का विशाल जुलूस शहर की सड़कों से होता हुआ सीधे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय पहुँचा। रास्ते भर कार्यकर्ता "विद्यालय खोलो, शराब के ठेके बंद करो", "शिक्षा बचाओ – देश बचाओ" और "भाजपा हटाओ – शिक्षा बचाओ" जैसे नारे लगाते रहे।

कांग्रेस नेताओं के तीखे हमले

"पढ़ाई छीनो, शराब दो – यही है भाजपा का नारा": विक्रम पांडे

कांग्रेस जिलाध्यक्ष विक्रम पांडे ने कहा—

“भाजपा सरकार गरीब बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीन रही है। गांव-गांव में विद्यालयों पर ताले लग रहे हैं, जिससे बच्चों को कई किलोमीटर दूर पढ़ने जाना पड़ेगा, या वे पढ़ाई ही छोड़ देंगे। यह सीधे संविधान के अनुच्छेद 21-A का उल्लंघन है।”

"विद्यालयों पर ताले, शराब की दुकानें चालू": अनुपम दीक्षित

शहर अध्यक्ष अनुपम दीक्षित ने आरोप लगाया—

“सरकार रोजगार देने से बच रही है, इसलिए शिक्षक बनने के अवसर भी खत्म कर रही है। जिस देश में पाठशालाएं बंद और मधुशालाएं खुली रहें, वहां युवाओं का भविष्य सिर्फ अंधेरे में जाएगा।”

"शिक्षकों को बना दिया है क्लर्क": शिवा पाल

प्रदेश उपाध्यक्ष (OBC विभाग) शिवा पाल ने कहा—

“शिक्षकों को पढ़ाने की बजाय गैर-शैक्षणिक कामों में झोंक दिया गया है। अब विद्यालय बंद कर उन्हें पूरी तरह निष्क्रिय करने की साजिश रची जा रही है।”

प्रशासन में हलचल, पुलिस बल की तैनाती

जब कांग्रेस कार्यकर्ता तख्तियां, बैनर और झंडे लेकर बीएसए कार्यालय पहुंचे, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। भारी भीड़ को देखते हुए मौके पर काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। कार्यकर्ताओं के आक्रोश और नारेबाजी से माहौल पूरी तरह गर्म रहा।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

  1. विद्यालय विलय और बंदी की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए।

  2. हर गांव में स्थानीय स्तर पर शिक्षा की सुविधा सुनिश्चित की जाए।

  3. शिक्षकों को सम्मान, स्थायित्व और पूर्णकालिक शिक्षण कार्य में लगाया जाए।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी में विद्यालय बंद करने की यह नीति आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकती है। हरदोई से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश में गूंजने लगी है। सवाल सिर्फ स्कूल बंद होने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का है।

नेताओं की मौजूदगी

प्रदर्शन में डॉ. राजीव सिंह (लोकसभा प्रभारी), सुनीता देवी (महिला अध्यक्ष), भुट्टो मियां, लालाराम शुक्ला, श्रीकांत अग्निहोत्री समेत अनेक वरिष्ठ नेता और फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

निष्कर्ष:
हरदोई का यह आंदोलन साफ संकेत देता है कि शिक्षा को लेकर राजनीतिक संघर्ष अब तेज होगा। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह विद्यालय बंद करने की नीति को हर स्तर पर चुनौती देगी और जरूरत पड़ने पर राज्यव्यापी आंदोलन भी करेगी।