कांग्रेस के दिग्गज नेता की पीएम मोदी ने की तारीफ, कहा — "उनके आदर्श हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं"
अनुरीत टाइम्स । नई दिल्ली।
भारतीय राजनीति के इतिहास में विरले ही ऐसे मौके आते हैं जब देश के प्रधानमंत्री किसी विपक्षी दल के नेता की सार्वजनिक मंच से खुलकर प्रशंसा करें। ऐसा ही एक प्रेरणादायी दृश्य सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे के. कामराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में कहा,
"श्री के. कामराज जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और समाज के प्रति उनका समर्पण अनुकरणीय है। उन्होंने स्वतंत्र भारत में उत्कृष्ट नेतृत्व दिया। उनके उच्च आदर्श और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणा हैं।"

कामराज : त्याग और नेतृत्व का प्रतीक

के. कामराज का राजनीतिक जीवन भारत की आज़ादी की लड़ाई से शुरू हुआ। उन्होंने कई बार जेल की सजा काटी, लेकिन उनके भीतर कभी भी सत्ता की लालसा नहीं दिखी। आज़ादी के बाद वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और इस पद पर रहते हुए उन्होंने शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में दूरगामी सुधार किए।

उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी ‘कामराज योजना’, जिसके अंतर्गत तमिलनाडु में गरीब बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना की शुरुआत की गई — एक ऐसा कदम जिसने आगे चलकर पूरे देश में स्कूली शिक्षा के स्तर को सुधारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी क्यों है अहम?

वर्तमान में जब भारतीय राजनीति ध्रुवीकरण की स्थिति में है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच संवाद लगभग समाप्तप्राय है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक कांग्रेस नेता के प्रति यह आदर भाव दिखाना लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्पुष्टि करता है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि कामराज वही नेता थे जिन्होंने इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाए जाने में अहम भूमिका निभाई थी, और खुद कभी प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में नहीं आए — यह उनके त्याग और संगठन के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण है।

राजनीतिक सीमाओं से परे प्रेरणा

के. कामराज का जीवन इस बात का प्रतीक है कि सच्चा जननेता वह होता है जो सत्ता को साधन नहीं, सेवा का माध्यम मानता है। उन्होंने न केवल राजनीति को शुचितापूर्ण बनाए रखा, बल्कि जनता के बीच रहकर अपनी सादगी और कर्मठता से उदाहरण भी पेश किया।

प्रधानमंत्री मोदी की यह श्रद्धांजलि हमें यह भी याद दिलाती है कि राजनीतिक मतभेद अपने स्थान पर हो सकते हैं, लेकिन जो नेता समाज को दिशा देने का काम करते हैं, वे सभी दलों से ऊपर होते हैं — वे संघर्षशील इतिहास और संवेदनशील भविष्य के बीच सेतु की तरह होते हैं।

इस संदर्भ में मोदी की बात को केवल औपचारिक श्रद्धांजलि न मानकर, एक वैचारिक उदारता और ऐतिहासिक स्वीकार्यता के रूप में देखा जाना चाहिए — खासकर तब जब देश को समरसता, संवाद और समानता की सबसे अधिक ज़रूरत है।

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