जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का हवाला; देश में उपराष्ट्रपति चुनाव की उलटी गिनती शुरू
जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का हवाला; देश में उपराष्ट्रपति चुनाव की उलटी गिनती शुरू
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2025 | अनुरीत टाइम्स
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया, जिसकी पुष्टि राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति से हुई। इस्तीफे का कारण बताया गया है — स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं और चिकित्सकीय सलाह का पालन। उनका इस्तीफा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(क) के तहत स्वीकार किया गया है, जो उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति को लिखित रूप में इस्तीफा देने की व्यवस्था करता है।
धनखड़ के इस्तीफे ने देश को चौंकाया
69 वर्षीय धनखड़ की सेहत को लेकर बीते कुछ महीनों से अटकलें थीं, हालांकि इस स्तर के इस्तीफे की उम्मीद किसी ने नहीं की थी। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा:
> "स्वास्थ्य मेरी प्राथमिकता बन चुकी है और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार मुझे कुछ समय पूर्ण विश्राम की आवश्यकता है। देश की सेवा करना मेरे जीवन का गौरव रहा है, परंतु अब समय है कि मैं अपनी शारीरिक स्थिति को प्राथमिकता दूं।"
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके योगदान की सराहना करते हुए इस्तीफे को स्वीकृति प्रदान की और उन्हें स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं दीं।
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🏛️ उपराष्ट्रपति पद: संवैधानिक व्यवस्था क्या कहती है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अनुसार, यदि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को लिखित रूप में इस्तीफा देते हैं, तो वह पद तत्काल प्रभाव से रिक्त माना जाता है।
अब, भारत में नया उपराष्ट्रपति चुनने के लिए 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। चुनाव प्रक्रिया की निगरानी भारत निर्वाचन आयोग द्वारा की जाएगी।
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🧾 तीन वर्ष का गरिमामयी कार्यकाल
जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। वे पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल और राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ वकील और भाजपा नेता रहे हैं। अपने तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने राज्यसभा की अध्यक्षता करते हुए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करवाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
हालांकि विपक्ष ने कई बार आरोप लगाए कि उन्होंने सरकार के पक्ष में पूर्वग्रह दिखाया, लेकिन उनके भाषणों में संविधान, लोकतंत्र और विधायी प्रक्रिया के प्रति निष्ठा स्पष्ट दिखाई देती थी।
उन्होंने कई बार कहा:
> "संसद संवाद का मंदिर है, टकराव का नहीं।"
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🔁 राज्यसभा में अब क्या होगा?
धनखड़ के इस्तीफे के बाद, राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह करेंगे, जब तक कि नया उपराष्ट्रपति न चुन लिया जाए। यह एक संवैधानिक व्यवस्था है जिससे उच्च सदन का कामकाज बाधित न हो।
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🔎 राजनीतिक हलकों में संभावनाओं की गूंज
धनखड़ के इस्तीफे ने देश की राजनीतिक फिजा में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सभी निगाहें केंद्र सरकार और प्रमुख राजनीतिक दलों पर टिकी हैं कि अगला उम्मीदवार कौन होगा। संभावित नामों में पूर्व राज्यपाल, वरिष्ठ सांसद, और अनुभवी न्यायविद जैसे कुछ चर्चित चेहरे शामिल हो सकते हैं।
संभावित नामों में:
थावरचंद गहलोत (कर्नाटक के राज्यपाल)
अरुण गोयल (पूर्व चुनाव आयुक्त)
सुषील मोदी (पूर्व उपमुख्यमंत्री, बिहार)
कपिल सिब्बल (स्वतंत्र लेकिन अनुभवी)
रिटायर्ड न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा (जस्टिस बैकग्राउंड से आने वाला नाम)
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🕰️ चुनाव प्रक्रिया की समयसीमा
चरण अनुमानित समय
निर्वाचन अधिसूचना जारी अगस्त 2025 के प्रारंभ में
नामांकन की अंतिम तिथि अधिसूचना से 14 दिन
मतदान (यदि आवश्यक हो) सितंबर 2025 के मध्य
परिणाम की घोषणा मतदान के 24 घंटों में
मतदाता कौन होते हैं?
केवल संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — के निर्वाचित एवं मनोनीत सदस्य ही इस चुनाव में मतदान करते हैं।
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🧭 जनभावना और मीडिया रिएक्शन
जनमानस में मिश्रित भावनाएँ देखने को मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर 'Get Well Soon Dhankhar Ji' ट्रेंड कर रहा है, वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने इस घटनाक्रम को 2026 लोकसभा चुनावों से पहले BJP की रणनीतिक पुनर्संरचना से भी जोड़ा है।
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा:
> "धनखड़ जी का जाना राजनीतिक नुकसान नहीं, बल्कि व्यक्तिगत शून्यता है। उन्होंने ऊँचे संवैधानिक पद पर गरिमा के साथ काम किया।"
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✍️ समापन विचार
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा एक संवैधानिक औपचारिकता भर नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक और मानवीय घटना है। वे एक वकील थे, राजनीतिज्ञ थे, राज्यपाल रहे और फिर उपराष्ट्रपति। लेकिन अब वे एक बीमार बुज़ुर्ग हैं, जो सम्मानपूर्वक पीछे हटे हैं — और यही शायद भारत के लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत बात है: सत्ता से विदाई भी गरिमा के साथ।