गोरखपुर: शिक्षिका ने प्यार में असफल होने पर की आत्महत्या की कोशिश


अनुरीत टाइम्स, गोरखपुर |

गोरखपुर जनपद से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक निजी स्कूल में कार्यरत शिक्षिका ने प्रेम प्रसंग में असफल होने के कारण आत्महत्या करने की कोशिश की। घटना मंगलवार देर शाम की बताई जा रही है, जब शिक्षिका को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय शिक्षिका शहर के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में पिछले चार वर्षों से कार्यरत थीं। उन्होंने कथित तौर पर एक सहकर्मी से प्रेम संबंध बना लिया था। दोनों के बीच काफ़ी समय से बातचीत और मेल-मुलाक़ात हो रही थी, लेकिन हाल ही में उनके संबंधों में खटास आ गई थी। बताया जा रहा है कि युवक ने किसी और से शादी करने का निर्णय ले लिया, जिसकी जानकारी मिलते ही शिक्षिका मानसिक रूप से टूट गईं।

परिजनों के अनुसार, शिक्षिका कई दिनों से अवसाद में थीं और कम ही बोलती थीं। मंगलवार की शाम उन्होंने अपने कमरे में खुद को बंद कर लिया और अत्यधिक मात्रा में नींद की गोलियां खा लीं। जब उन्होंने दरवाजा नहीं खोला तो परिजनों को शक हुआ और उन्होंने दरवाजा तोड़ा। शिक्षिका बेहोशी की हालत में पाई गईं, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में जिला अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद बताया कि समय पर इलाज मिल जाने के कारण उनकी जान बच गई, लेकिन अभी भी उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें ICU में निगरानी में रखा गया है।

पुलिस को भी इस मामले की सूचना दे दी गई है। थाना प्रभारी का कहना है कि फिलहाल परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है, लेकिन मामले की जांच की जा रही है। शिक्षिका के मोबाइल और कमरे से कुछ डायरी के पन्ने बरामद किए गए हैं, जिसमें उन्होंने अपने टूटे दिल और दर्द को शब्दों में बयां किया है।

इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मोहल्ले के लोगों के अनुसार, शिक्षिका बेहद सुलझी हुई और शालीन स्वभाव की थीं। उन्हें देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि वह अंदर से इतनी परेशान हैं।

विशेषज्ञों की सलाह:

मानसिक स्वास्थ्य के जानकारों का कहना है कि प्रेम में असफलता जीवन का अंत नहीं होती। ऐसे मामलों में दोस्तों, परिवार और मनोचिकित्सकों से बात करना बेहद जरूरी है। युवाओं को इस तरह के मानसिक तनाव से उबरने के लिए सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए।

यह घटना न सिर्फ एक दुखद व्यक्तिगत मामला है, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस हद तक भावनात्मक रूप से अकेले हो गए हैं।