जातिवाद को लेकर घोले जा रहे जहर पर बोले महंत पवन दास – “हिंदू मतलब सिर्फ हिंदू”

बेनीगंज में लाइब्रेरी उद्घाटन के दौरान तुष्टिकरण और जातीय राजनीति पर कड़ा बयान

अनुरीत टाइम्स न्यूज़ | हरदोई

नैमिषारण्य से बेनीगंज तक – एक कार्यक्रम, लेकिन बड़ा संदेश

हरदोई जिले के बेनीगंज कस्बे में हाल ही में एक नई लाइब्रेरी के उद्घाटन कार्यक्रम में नैमिषारण्य स्थित हनुमानगढ़ी के महंत पवन दास ने ऐसा बयान दिया, जिसने प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी। साधु-संतों की सी गंभीरता और साफगोई के साथ उन्होंने सीधे-सीधे जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति पर प्रहार किया।

“हम हिंदू हैं, इसमें जाति या पांति नहीं”

महंत पवन दास ने मंच से कहा—

“हम लोग हिंदू हैं। इसमें कोई जाति, पांति नहीं है। लेकिन कुछ लोग इसमें जातीय जहर घोलने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि वे राजनीतिक लाभ उठा सकें। यह समाज को तोड़ने की साजिश है।”

उन्होंने साफ इशारा किया कि ऐसे लोग सामाजिक एकता को तोड़कर राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं, लेकिन देश और प्रदेश का मौजूदा नेतृत्व इसके आगे झुकने वाला नहीं है।

“अगले 10-20 साल तक नहीं चलेगा जातीय खेल”

महंत पवन दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा—

“मजबूत नेतृत्व के कारण अगले 10-20 साल तक किसी को भी जातीय राजनीति से फायदा नहीं मिलेगा। चाहे जितनी कोशिशें कर लें, समाज अब पहले जैसा नहीं है। लोग जागरूक हो चुके हैं।”

तुष्टिकरण पर भी कड़ा रुख

सिर्फ जातिवाद ही नहीं, बल्कि तुष्टिकरण की राजनीति पर भी महंत पवन दास ने हमला बोला। उनका कहना था—

“विपक्ष में बैठे लोगों को इस तुष्टिकरण से कोई लाभ नहीं होगा। यह सिर्फ एक भ्रम है, और जनता अब इसे समझ चुकी है।”

उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समुदाय अंततः एकजुट रहेगा, चाहे कितनी भी विभाजनकारी ताकतें सक्रिय क्यों न हों।

राजनीतिक हलकों में चर्चा

महंत पवन दास का यह बयान सिर्फ धार्मिक प्रवचन नहीं, बल्कि मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात पर एक सीधा संदेश माना जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे बयान चुनावी माहौल में हिंदू एकजुटता के मुद्दे को और प्रबल कर सकते हैं।

कार्यक्रम में माहौल

लाइब्रेरी उद्घाटन समारोह में स्थानीय नागरिक, युवा छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। महंत पवन दास का संबोधन सुनने के लिए कार्यक्रम स्थल पर बड़ी भीड़ जुटी। लोगों ने बार-बार उनके विचारों पर जयकारे और तालियों से सहमति जताई।

निष्कर्ष

महंत पवन दास का यह संदेश—“हिंदू मतलब सिर्फ हिंदू”—साफ तौर पर जातिवाद और तुष्टिकरण के खिलाफ एक एकजुटता का आह्वान है। उन्होंने न सिर्फ एक धार्मिक दृष्टिकोण दिया, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी छोड़ा कि आने वाले वर्षों में विभाजनकारी राजनीति को जनता खारिज कर सकती है