"स्कूल मत बंद कीजिए" — एक मासूम बच्ची की देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मार्मिक अपील
अनुरीत टाइम्स | ग्रामीण शिक्षा विशेष रिपोर्ट | 10 जुलाई 2025
"हमारे स्कूल को बंद मत कीजिए, हम यहीं पढ़ना चाहते हैं, यहीं खुश रहना चाहते हैं..."
यह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक मासूम बच्ची की गुहार है, जो भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाई गई है। यह चिट्ठी हर उस बच्चे की आवाज़ है, जिनकी पढ़ाई का सपना स्कूल बंद होने के कारण अधूरा रह जाने का खतरा झेल रहा है।

उत्तर भारत के एक छोटे से गांव की यह बच्ची अपनी सादगी भरी भाषा में लिखती है —

> "हम एक छोटे गांव के बच्चे हैं। हमारे गांव का स्कूल अब बंद किया जा रहा है और हमें दूसरे गांव भेजा जा रहा है। वहां तक पहुंचना मुश्किल है, रास्ते में कुत्ते होते हैं, खेत होते हैं और कोई बड़ा साथ नहीं होता तो डर भी लगता है।"

पत्र में साफ़ तौर पर बताया गया है कि गांव के बच्चों के लिए यह स्कूल सिर्फ एक पढ़ाई का स्थान नहीं बल्कि उनका दूसरा घर है — जहाँ उनके दोस्त हैं, उनके प्रिय शिक्षक हैं, और एक सुरक्षित माहौल है। लेकिन अब उस स्कूल को “मर्ज” यानी किसी और स्कूल में मिलाया जा रहा है, जिससे बच्चों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा।

बच्ची आगे लिखती है:

> "हमारे माँ-पापा गरीब हैं, वे हमें गाड़ी से नहीं भेज सकते। और अगर स्कूल बहुत दूर हुआ, तो शायद मैं भी पढ़ाई छोड़ दूं।"

'हमें डॉक्टर, अफसर बनना है, लेकिन स्कूल बंद हुआ तो कैसे?'

पत्र का सबसे भावुक हिस्सा तब आता है जब बच्ची कहती है:

> "हम कुछ बनना चाहते हैं — डॉक्टर, टीचर, अफसर... लेकिन बिना स्कूल के कैसे?"

यह सवाल सिर्फ सरकार से नहीं, पूरे समाज से है — क्या हम वाकई "हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार" देने में सफल हो पाए हैं? क्या सिर्फ शहरों में बड़े-बड़े स्कूल खोलकर हम यह मान लें कि गांवों के बच्चे किसी काम के नहीं?
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क्या कहता है कानून?
भारत में अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क और नज़दीकी स्कूल में पढ़ाई का अधिकार है। यदि प्रशासनिक फैसलों के कारण बच्चों को बहुत दूर भेजा जा रहा है, तो यह सीधा इस कानून का उल्लंघन है।
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अनुरीत टाइम्स की विशेष अपील:
हमारी यह विशेष खबर उन नीतिगत योजनाओं पर एक सवाल है जो जमीन पर बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को नजरअंदाज कर रही हैं।
शिक्षा कोई "बोझ" नहीं, बच्चों का भविष्य है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी गांव के बच्चों को शिक्षा से वंचित न किया जाए — खासकर सिर्फ इसलिए कि उनका स्कूल "छोटा" है।