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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: हरदोई में इतिहास की पीड़ा को याद करता मौन जुलूस

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: हरदोई में इतिहास की पीड़ा को याद करता मौन जुलूस



हरदोई उत्तर प्रदेश : भारत के स्वतंत्रता संग्राम का समापन जितना गौरवशाली था, उतना ही पीड़ादायक उसका परिणाम भी रहा। 15 अगस्त 1947 को जब भारत आज़ाद हुआ, तो इसके साथ ही देश का विभाजन भी हुआ। यह विभाजन केवल भूगोल का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों-करोड़ों दिलों, परिवारों और संस्कृतियों के चीर-हरण की घटना थी। इसी ऐतिहासिक दर्द को याद करने और नई पीढ़ी को उस त्रासदी से परिचित कराने के लिए 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है।





हरदोई में भाजपा का आयोजन

हरदोई जिला पंचायत सभागार में भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस दिवस पर एक संगोष्ठी और मौन जुलूस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश मंत्री वीरेंद्र तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती और जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने दीप प्रज्वलित कर की। सभागार में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, पूर्व सैनिक और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उन विभाजन पीड़ित परिवारों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने 1947 की त्रासदी का दर्द झेला था। उन्हें अंगवस्त्र भेंट किए गए। मंच पर सम्मान पाते समय कई बुजुर्गों की आंखों में पुराने घावों की नमी साफ झलक रही थी।

विभाजन की भयावहता पर विचार


मुख्य वक्ता वीरेंद्र तिवारी ने अपने उद्बोधन में विभाजन की विभीषिका को याद किया। उन्होंने कहा कि विभाजन कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि मानवता के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक थी। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए, हजारों महिलाओं ने अपनी अस्मिता खोई और लाखों लोगों ने हिंसा की भेंट चढ़कर अपने प्राण गंवाए।

तिवारी ने कहा कि,

> “कांग्रेस नेतृत्व की गलत नीतियों और तुष्टिकरण की राजनीति ने इस विभाजन को जन्म दिया। उस समय सत्ता पाने की जल्दी में ऐसे फैसले लिए गए, जिनकी कीमत निर्दोष जनता को अपने प्राण गंवाकर चुकानी पड़ी।’’

प्रेमावती का भावनात्मक संबोधन



जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती ने कहा कि 15 अगस्त को हम सब स्वतंत्रता का उत्सव मनाते हैं, लेकिन उससे एक दिन पहले 14 अगस्त हमें यह याद दिलाता है कि आज़ादी के साथ कितनी बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि,

> “यह केवल भारत और पाकिस्तान का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह लाखों-करोड़ों दिलों का बंटवारा था। यह केवल जमीन का टुकड़ा बांटना नहीं था, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और भाईचारे को तोड़ देने वाली त्रासदी थी।’’

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिन को आधिकारिक रूप से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस घोषित करने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया।

जिलाध्यक्ष का आभार और संकल्प

भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने कार्यक्रम का समापन करते हुए कहा कि यह स्मृति दिवस हमें केवल अतीत की पीड़ा ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सीख भी देता है। उन्होंने कहा कि हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि राजनीतिक स्वार्थ, नफरत और तुष्टिकरण की वजह से फिर कभी ऐसा वातावरण न बने, जो देश को विभाजन जैसी त्रासदी की ओर ले जाए।

उन्होंने सभी उपस्थित अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

मौन जुलूस: श्रद्धांजलि का प्रतीक

संगोष्ठी के बाद जिला पंचायत परिसर से शहीद उद्यान तक मौन जुलूस निकाला गया।

जुलूस में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्वक आगे बढ़े।

सभी ने मौन रहकर विभाजन में शहीद हुए लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी।

शहीद उद्यान पहुंचने पर पुष्प अर्पित किए गए और मौन धारण कर विभाजन पीड़ितों को नमन किया गया।

मौन जुलूस का यह दृश्य हर किसी के मन में संवेदनाओं की लहरें जगा गया। राह चलते आम लोग भी रुककर इस जुलूस को देखते रहे और कई ने शामिल होकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।

गरिमामय उपस्थिति

इस अवसर पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें निवर्तमान जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष राजीव रंजन मिश्रा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अशोक सिंह, विवेक भसीन, सरदार रूपेंद्र सिंह बिंशी, नगर पालिका अध्यक्ष सुखसागर मिश्र, ब्लाक प्रमुख अनिल सिंह राजपूत शामिल रहे।

उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

निष्कर्ष: पीड़ा से सीख

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल शोक मनाने का दिन नहीं है। यह एक चेतावनी है—इतिहास से मिलने वाली सीख है। हमें याद रखना होगा कि नफरत की राजनीति और सत्ता के लोभ ने देश को कभी तोड़ा था। अगर हम सतर्क न रहें तो इतिहास अपने आपको दोहरा सकता है।

हरदोई में आयोजित यह संगोष्ठी और मौन जुलूस न केवल विभाजन पीड़ितों को श्रद्धांजलि था, बल्कि यह संकल्प भी था कि हम आने वाली पीढ़ियों को उस पीड़ा से अवगत कराते रहेंगे और अपने राष्ट्र की एकता, अखंडता और भाईचारे की रक्षा करेंगे।

✍️ पाठकों के लिए सवाल:

क्या आपके परिवार या परिचितों में किसी ने विभाजन का दर्द झेला है? क्या आप उनकी कहानी जानते हैं?

उसे याद करना और साझा करना ही उन लाखों बलिदानों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।