लैंगिक समानता और महिला कल्याण पर विशेष विधिक जागरूकता शिविर, ग्रामीण महिलाओं ने ली योजनाओं की जानकारी हरदोई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदोई के तत्वावधान में मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उधरनपुर में एक विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सचिव/तहसीलदार संध्या यादव ने की, जिसमें लैंगिक समानता और महिलाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
लैंगिक समानता: अधिकार और जिम्मेदारी दोनों संध्या यादव ने अपने संबोधन में कहा कि लैंगिक समानता का अर्थ केवल महिलाओं और पुरुषों को समान अवसर देना नहीं, बल्कि उन्हें समाज के हर क्षेत्र में बराबरी का अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि— “लैंगिक समानता का मतलब है बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति को उसके योग्य अवसर और सम्मान देना। यह केवल महिला अधिकारों का मामला नहीं, बल्कि समाज के संतुलित और स्थायी विकास की नींव है।” उन्होंने यह भी बताया कि लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव समाप्त करने के लिए शिक्षा और जनजागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि लोग लैंगिक भेदभाव के परिणामों को समझ सकें और समानता को बढ़ावा दे सकें। महिला कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ग्राम सभा अधिवक्ता आशुतोष कुमार त्रिपाठी ने अपने संबोधन में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, विकलांगों और गरीब परिवारों के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में सुधार करना है। इनमें आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा के अवसर और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं शामिल हैं। निःशुल्क विधिक सेवाएं और लोक अदालत के लाभ मोहम्मद शाज़ेब सिद्दीकी ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति मुफ्त में कानूनी सलाह और सहायता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत के फायदों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसमें मामलों का त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण निपटारा होता है, जिससे वादकारियों का समय और धन दोनों की बचत होती है। ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं मौजूद रहीं। उन्होंने योजनाओं और कानूनी अधिकारों से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने विस्तार से उत्तर दिया। कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं समय-समय पर होनी चाहिए, ताकि गांव की महिलाओं को अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं के बारे में सही जानकारी मिल सके। अधिकारियों और स्वयंसेवकों की मौजूदगी शिविर में परा विधिक स्वयंसेवक राघवेन्द्र विक्रम सिंह, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी, अन्य स्वास्थ्यकर्मी, अधिवक्ता और स्थानीय ग्रामवासी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीण महिलाओं को पंपलेट और गाइडबुक वितरित किए गए, जिनमें योजनाओं और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई थी।