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केजीएमयू में पोस्टमार्टम विवाद: विशेषज्ञ डॉक्टरों के बजाय सामान्य डॉक्टर कर रहे पीएम, नैक ने उठाए सवाल

केजीएमयू में पोस्टमार्टम विवाद: विशेषज्ञ डॉक्टरों के बजाय सामान्य डॉक्टर कर रहे पीएम, नैक ने उठाए सवाल राजधानी के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में से एक, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चिकित्सा क्षेत्र में गुणवत्ता और नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नैशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड (NABH) के मूल्यांकन के लिए आई टीम ने केजीएमयू के पोस्टमॉर्टम हाउस का निरीक्षण किया, जहां उन्हें पता चला कि पोस्टमार्टम (PM) विशेषज्ञ डॉक्टरों की बजाय सामान्य डॉक्टर कर रहे हैं। मामला क्या है? नैक टीम के निरीक्षण में यह बात सामने आई कि केजीएमयू के फरेंसिक विभाग में चार विशेषज्ञ डॉक्टर, चार सीनियर रेजिडेंट, 13 जूनियर रेजिडेंट और एक स्पेशियलिस्ट होने के बावजूद पोस्टमार्टम की ड्यूटी पीडियाट्रिक, महिला रोग विशेषज्ञ और सामान्य सर्जन जैसे डॉक्टरों को लगाई जा रही है। जब नैक टीम ने इस बाबत सवाल किया तो केजीएमयू के जिम्मेदार अधिकारियों ने बताया कि “गाइडलाइंस के अनुसार पांच साल की प्रैक्टिस के बाद किसी भी डॉक्टर को पोस्टमार्टम हाउस में ड्यूटी दी जा सकती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगाना उनकी पढ़ाई बाधित कर सकता है।” क्यों है यह चिंता का विषय? पोस्टमार्टम एक संवेदनशील और विशेषज्ञता मांगने वाली प्रक्रिया है, जिसमें फरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका अहम होती है। सामान्य डॉक्टरों का पोस्टमार्टम करना, बिना विशेषज्ञता के, मामले की गंभीरता और सटीकता पर असर डाल सकता है। इसके अलावा, पीडियाट्रिक, महिला रोग विशेषज्ञ और सर्जन जैसे डॉक्टरों को पोस्टमार्टम के लिए लगाना उनके मरीजों के इलाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है क्योंकि वे उस समय अपनी विशेषज्ञता का सही उपयोग नहीं कर पाते। विशेषज्ञों का पक्ष फरेंसिक विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्टमार्टम में उनकी प्राथमिक भूमिका होनी चाहिए ताकि मामलों की जांच में किसी प्रकार की कमी न रहे। साथ ही, इससे छात्रों की पढ़ाई में भी रुकावट नहीं आएगी अगर उचित व्यवस्था की जाए। निष्कर्ष केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस प्रकार की व्यवस्थाएं चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के लिए खतरा हैं। पोस्टमार्टम के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की भूमिका सुनिश्चित करना, और उन्हें पूरी तरह से ड्यूटी पर लगाना अनिवार्य होना चाहिए। --- यदि आप चिकित्सा क्षेत्र और स्वास्थ्य प्रशासन की खबरों में रुचि रखते हैं, तो इस विषय पर नजर बनाएं रखें। केजीएमयू प्रशासन से भी उम्मीद की जाती है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सुधारात्मक कदम उठाएंगे। --- आपके विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं! कृपया इस विषय पर अपनी राय कमेंट में लिखें।