भीषण बारिश में बिजली बहाली के लिए जान जोखिम में डाल काम करते रहे कर्मचारी, जज्बे को देखकर आमजन ने किया सलाम हरदोई, बेनीगंज। रविवार की सुबह जैसे ही आसमान से तेज़ बारिश की बौछारें बरसने लगीं, जनपद के अधिकतर लोग अपने घरों में दुबक कर बैठ गए। तेज़ गरज और लगातार गिरती बिजली ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया। लेकिन इसी मूसलाधार बारिश में, जब न सड़कें साफ़ थीं, न हालात सामान्य — बेनीगंज बिजली विभाग के कर्मचारी पूरी संजीदगी और समर्पण के साथ बिजली आपूर्ति को बहाल करने में जुटे रहे। यह कोई सामान्य कार्य नहीं था — हर तरफ जलभराव, दलदली खेत, गिरे हुए पेड़ और टूटे हुए तार। लेकिन इन बाधाओं ने न तो इन कर्मियों के हौसले को डिगाया, और न ही उनकी कर्तव्यपरायणता में कोई कमी आने दी। जहां आम लोग खुद की सुरक्षा के लिए घरों में छिपे बैठे थे, वहीं इन कर्मचारियों ने बिना छाता, बिना किसी अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण के, सीधे खंभों पर चढ़कर काम किया। कंपकपाते हाथ, कीचड़ से सने कपड़े, बारिश की धार में भीगते बदन, और खतरनाक हाई वोल्टेज के तार — इन सबके बीच भी इनका फर्ज़ सबसे ऊपर था। जंगलों, खेतों और सड़कों पर टूटे तार समेटते दिखे योद्धा विभाग की टीम सिर्फ मुख्य सड़कों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों, जलमग्न खेतों और झाड़ियों के बीच भी उन्होंने टूटे तारों को खोज-खोजकर दुरुस्त किया। कई जगहों पर पेड़ों के नीचे दबे तारों को निकालने के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी। इन कर्मियों को बिजली खंभों की मरम्मत के दौरान न केवल खराब मौसम से जूझना पड़ा, बल्कि आवाजाही के कारण सड़क किनारे कार्य करना भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। वाहन चालकों की लापरवाही और तेज़ रफ्तार ने खतरे को और बढ़ा दिया। देर शाम तक नहीं लौटी बिजली, व्यापारियों को उठानी पड़ी परेशानी गांवों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी, और तमाम प्रयासों के बावजूद कई इलाकों में देर शाम तक बिजली बहाल नहीं हो सकी। इसका सबसे अधिक असर छोटे दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ा, जिनकी रोज़ी-रोटी का आधार ही बिजली है। हालांकि इस बार स्थिति कुछ अलग थी। आमतौर पर बिजली गुल होते ही लोग गुस्से में बिजली विभाग को कोसते हुए नजर आते हैं, लेकिन इस बार जब लोगों ने कर्मचारियों को इस विकट मौसम में जान की परवाह किए बिना कार्य करते देखा — तो हर ओर से वाहवाही सुनाई देने लगी। एसडीओ, जेई और एसएसओ की टीम ने निभाया नेतृत्व, लोगों ने दी शाबाशी इस पूरी मुहिम में एसडीओ पुनीत कुमार दुबे, जेई गोविंद मौर्त, एसएसओ नन्दकिशोर और उनकी टीम के अन्य कर्मियों की भूमिका सराहनीय रही। उन्होंने न केवल टीम का नेतृत्व किया, बल्कि खुद भी हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। कई स्थानों पर राहगीरों ने काम कर रहे कर्मचारियों को देखकर हाथ जोड़कर अभिवादन किया। व्यापारियों ने चाय-पानी की व्यवस्था की, जबकि कई ग्रामीणों ने कर्मचारियों के लिए अस्थायी छावनियां बनाईं। कर्मठता की मिसाल बने ये सच्चे हीरो यह रिपोर्ट सिर्फ एक समाचार नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है। ऐसे समय में जब अधिकांश लोग आराम और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, वहां ये कर्मचारी हमें सिखाते हैं कि ड्यूटी का मतलब सिर्फ काम नहीं, एक कर्तव्य और सेवा भावना भी होता है। उपसंहार (निष्कर्ष): "बिजली के तारों में दौड़ती शक्ति सिर्फ करंट नहीं, कर्म है। और जब कर्मियों का हौसला बिजली से भी तेज़ चमके, तब समाज को रौशनी का असली मतलब समझ आता है।"