पीली ईंटों से बिछ रहा घटिया खड़ंजा, ऊपर डाली जा रही मिट्टी — ताकि ग़लतियां न दिखें। शिकायत के बाद भी जांच टीम नहीं पहुँची, ग्रामीणों ने मांगी जिलाधिकारी से जांच।
बहरैया गांव में मानकविहीन खड़ंजा निर्माण का खेल: ईंटों पर मिट्टी डालकर छिपाई जा रही सच्चाई, शिकायत के बाद भी प्रशासन मौन
हरदोई। जनपद हरदोई के सुरसा विकासखंड के ग्राम बहरैया में हो रहे खड़ंजा निर्माण कार्य ने पूरे क्षेत्र में सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्य में न केवल घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, बल्कि ईंटें मानक के विपरीत ढंग से बिछाई जा रही हैं, जिससे सरकारी धन का खुला दुरुपयोग हो रहा है।
गांव के लोगों ने बताया कि निर्माण में उपयोग हो रही पीली ईंटें बेहद कमजोर और टूटने वाली हैं, जो सामान्य बारिश या दबाव में टूट सकती हैं। निर्माण के बाद मजदूरों द्वारा पूरे खड़ंजे पर मिट्टी डाली जा रही है ताकि ईंटें दिखाई न दें। ग्रामीणों का कहना है कि यह काम जानबूझकर किया जा रहा है ताकि जब अधिकारी या जनप्रतिनिधि निरीक्षण करें तो उन्हें निर्माण की वास्तविक स्थिति न दिखे।
🔹 ईंटों के बीच रखी जा रही है ज्यादा दूरी
ग्रामवासियों के अनुसार, जहां एक मजबूत खड़ंजे के लिए ईंटों को बिल्कुल सटाकर बिछाना चाहिए, वहीं बहरैया में ईंटों के बीच एक इंच से भी अधिक का फासला रखा जा रहा है। इस वजह से खड़ंजा जल्द ही टूटने लगेगा। कई स्थानों पर ईंटें टेढ़ी-मेढ़ी और असमान रूप से बिछाई गई हैं।
एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया
“हमारे गांव में जो ईंटें बिछाई जा रही हैं, वो सरकारी मानक की नहीं हैं। ऊपर से उन पर मिट्टी डाल दी गई है ताकि खराबी किसी को दिखाई न दे। हमने कई बार काम रुकवाने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
🔹 शिकायत के बावजूद नहीं हुई कोई कार्रवाई
जब ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत जिला पंचायत अध्यक्ष के निजी सचिव से की, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा — “बताइए, क्या समस्या है?” ग्रामीणों ने विस्तार से अपनी बात रखी कि बहरैया गांव में पीली ईंट से घटिया निर्माण हो रहा है।
सचिव ने कहा कि “देखा जाएगा”, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो जांच टीम पहुंची और न ही कोई अधिकारी मौके पर आया।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से यह स्पष्ट है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से घटिया निर्माण को संरक्षण दिया जा रहा है।
🔹 पारदर्शिता पर सवाल
निर्माण स्थल पर न तो कार्य का सूचना बोर्ड लगाया गया है, न ही यह बताया गया है कि यह खड़ंजा किस योजना के तहत बन रहा है। किसी प्रकार की तकनीकी या वित्तीय जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की गई है, जो नियमों के विरुद्ध है।
ग्रामवासियों ने कहा कि अगर यह कार्य किसी पंचायत योजना या जिला पंचायत निधि से हो रहा है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। बिना सूचना बोर्ड के कार्य कराना पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
🔹 अध्यक्ष के क्षेत्र में ही सवालिया निर्माण
बहरैया गांव सुरसा पंचम क्षेत्र में आता है, जहां से जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रेमावती पी.के. वर्मा ने चुनाव लड़ा था और जनता के समर्थन से विजयी हुई थीं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अध्यक्ष के अपने निर्वाचन क्षेत्र में ही मानकविहीन कार्य हो रहे हैं, तो यह जनता के विश्वास के साथ धोखा है।
गांव के एक बुजुर्ग निवासी ने कहा —
“हमने प्रेमावती जी को इसलिए जिताया था कि गांव का विकास हो। लेकिन अगर उनके ही क्षेत्र में ऐसे घटिया काम होंगे, तो हम
विश्वास किस पर करें?”
🔹 गांव में बढ़ रहा आक्रोश
खड़ंजा बिछाने का काम देखते हुए कई ग्रामीणों ने विरोध जताया और काम रुकवाने की मांग की। हालांकि, काम देख रहे लोगों ने कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश मिले हैं और वे कुछ नहीं कर सकते। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही जांच नहीं हुई, तो वे जिलाधिकारी से सामूहिक रूप से मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे।
🔹 प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरदोई और मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि —
1. बहरैया गांव के खड़ंजा निर्माण की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
2. निर्माण में उपयोग हो रही ईंटों और सामग्री की गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए।
3. कार्य से जुड़े अधिकारियों, ठेकेदारों और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका की जांच की जाए।
4. दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में जनता का पैसा इस तरह बर्बाद न हो।
5.
जनता का सवाल: क्या विकास कार्यों का यही चेहरा है?
ग्रामवासियों का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये गांवों के विकास के लिए भेजती है, लेकिन जब धरातल पर ऐसे कार्य होते हैं, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर विकास का पैसा किसकी जेब में जा रहा है।
