आईएएस अफ़सरों को महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार, शासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
आईएएस अफ़सरों को महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार, शासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की प्रशासनिक मशीनरी को और ज़्यादा चुस्त, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से गृह विभाग के तीन अनुभवी IAS अधिकारियों को सतर्कता विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब सरकार भ्रष्टाचार-निरोधक तंत्र को मजबूत करने, विभागीय समन्वय बढ़ाने और संवेदनशील मामलों की निगरानी को तेज़ करने पर लगातार ज़ोर दे रही है।
सरकारी आदेश के मुताबिक,
आईएएस अटल राय, जो वर्तमान में सचिव गृह के पद पर नियुक्त हैं, अब सचिव सतर्कता विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। अटल राय उन वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं जो शासन में अपनी गहरी समझ, कड़े निर्णयों और साफ़ प्रशासनिक छवि के लिए जाने जाते हैं। माना जा रहा है कि सतर्कता विभाग में उनकी भूमिका कई लंबित और महत्वपूर्ण जांच प्रक्रियाओं को गति देगी।
इसके साथ ही आईएएस पवन अग्रवाल, जो विशेष सचिव गृह के तौर पर कार्यरत हैं, उन्हें विशेष सचिव सतर्कता विभाग का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया है। पवन अग्रवाल की पहचान एक तेज़-तर्रार और नीतिगत मामलों में दक्ष अधिकारी के रूप में की जाती है। शासन स्तर पर उनकी पकड़ और फाइलवर्क की गति का लाभ सतर्कता विभाग को सीधे मिलता दिख सकता है, खासकर उन मामलों में जहां त्वरित कार्रवाई की जरूरत होती है।
तीसरे अधिकारी आईएएस राकेश कुमार मालपानी, जो भी विशेष सचिव गृह की ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं, को विशेष सचिव सतर्कता विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। मालपानी की कार्यशैली अनुशासित, व्यवस्थित और तथ्यों पर आधारित मानी जाती है। उनकी नियुक्ति से उम्मीद है कि विभागीय जांचों, सतर्कता रिपोर्टों और समीक्षा बैठकों का निष्पादन और भी अधिक व्यवस्थित होगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का कहना है कि इन तीनों अधिकारियों के पास गृह विभाग का गहरा अनुभव है, जिससे सतर्कता विभाग के साथ तालमेल स्वाभाविक रूप से बेहतर होगा। दोनों विभागों के बीच जानकारी का आदान-प्रदान, फाइल प्रोसेसिंग और संवेदनशील मामलों की निगरानी अब पहले से अधिक तेज़ और प्रभावी हो सकती है।
सरकारी सूत्रों का मानना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय भी सतर्कता विभाग के कामकाज को लेकर बेहद गंभीर है, और इसीलिए अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा जताया गया है। इस कदम को प्रशासनिक सुधारों की दिशा में उठाया गया एक सशक्त और संदेशपूर्ण फैसला माना जा रहा है—खासकर उन मामलों में जहां पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है।