सरकारी खाद के गड्ढों पर अवैध कब्जासरेहरी गांव में दबंगई के बल पर सरकारी भूमि पर निर्माण, ग्रामीणों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
सरकारी खाद के गड्ढों पर अवैध कब्जा
सरेहरी गांव में दबंगई के बल पर सरकारी भूमि पर निर्माण, ग्रामीणों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
बेहदर (हरदोई)।
बेहदर विकासखंड के सरेहरी गांव में सरकारी भूमि पर दबंगई के बल पर कब्जा करने का मामला सामने आया है। ग्राम समाज की संपत्ति, जो ग्रामीणों के सामूहिक उपयोग के लिए थी, अब व्यक्तिगत स्वार्थ का शिकार बन गई है। इस मामले को लेकर गांव में गहरा असंतोष व्याप्त है और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
मामला गाटा संख्या 794 से जुड़ा है, जो राजस्व अभिलेखों में “खाद गड्ढा” (गोबर और कचरा डालने के लिए सार्वजनिक भूमि) के नाम से दर्ज है। यह भूमि गांव के हर नागरिक के उपयोग के लिए थी ताकि वहां कूड़ा, गोबर आदि डालकर खेती-बाड़ी से संबंधित जैविक खाद तैयार की जा सके। लेकिन अब इस जमीन पर मनोज पुत्र बाबूराम ने अवैध कब्जा कर लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, मनोज ने पहले तो धीरे-धीरे इस भूमि पर अपना अधिकार जताना शुरू किया, और बाद में गड्ढों के आसपास अवैध निर्माण भी करा लिया।
गांव के निवासी राजेश ने बताया कि यह खाद गड्ढा वर्षों से उनके परिवार के उपयोग में रहा है। उनका कहना है कि “लगभग 50 साल से मेरा घूरा (गोबर डालने का स्थान) इसी भूमि में पड़ता चला आ रहा है। अब जब मैं गोबर डालने जाता हूं, तो मनोज मुझे रोक देता है, धमकाता है और कहता है कि यह जगह उसकी है।”
राजेश ने यह भी आरोप लगाया कि मनोज आए दिन गाली-गलौज करता है और धमकी देता है कि अगर विरोध किया तो हरिजन एक्ट में फँसा देगा। इस प्रकार की धमकियों के चलते ग्रामीणों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। गांव के कई लोगों ने बताया कि इस प्रकार का कब्जा पहली बार नहीं हुआ है, परंतु इस बार मामला गंभीर है क्योंकि यह जमीन राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से “खाद गड्ढा” के रूप में दर्ज है।
ग्रामीणों ने बताया कि सरेहरी गांव में पहले भी इस प्रकार की सरकारी जमीनों पर कब्जे की कोशिशें की गई हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण दबंगों के हौसले बढ़े हुए हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी संपत्ति पर कब्जा केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि पूरे समाज के हितों पर आघात है।
स्थानीय ग्रामीणों ने राजस्व विभाग, तहसील प्रशासन, और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से आग्रह किया है कि मामले की जांच कराई जाए और कब्जा हटवाने की कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो गांव की अन्य सार्वजनिक भूमि भी निजी स्वार्थों की भेंट चढ़ जाएगी।
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि “सरेहरी का यह खाद गड्ढा गांव के साझा उपयोग के लिए वर्षों पहले बनाया गया था, ताकि गांव के गोबर और कचरे का सही निस्तारण हो सके और खेती में जैविक खाद का उपयोग बढ़े।” ऐसे में इस जमीन पर अवैध निर्माण न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी नुकसानदेह है।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन को इस मुद्दे पर त्वरित संज्ञान लेकर भूमि को मुक्त कराना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सरकारी संपत्ति को अपनी निजी मिल्कियत समझने की जुर्रत न करे।
— अनुरीत टाइम्स न्यूज़, बेहदर (हरदोई)