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Showing posts from August 3, 2025

स्वतंत्रता दिवस पर बहरैया में डिजिटल लाइब्रेरी एवं अन्नपूर्णा भवन का शुभारंभ, शिक्षा और विकास को मिली नई दिशा

गोंडा में भीषण सड़क हादसा: बोलेरो के नहर में गिरने से 11 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत, पूरे इलाके में मातम छाया

गोंडा में भीषण सड़क हादसा: बोलेरो के नहर में गिरने से 11 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत, पूरे इलाके में मातम छाया घटना की शुरुआत: आस्था से मातम तक का सफर उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र में रविवार की सुबह एक ऐसी त्रासदी ने जन्म लिया, जो न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ी चेतावनी है। सीहागांव के 15 श्रद्धालु अयोध्या के प्रसिद्ध पृथ्वीनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए निकले थे। ये यात्रा उनके लिए आस्था, श्रद्धा और उम्मीदों से भरी थी, लेकिन दुर्भाग्यवश ये यात्रा एक भीषण हादसे में तब्दील हो गई। मिली जानकारी के अनुसार, बोलेरो वाहन बेलवा बहुता नहर के पास अनियंत्रित होकर सीधे नहर में जा गिरी। वाहन के पानी में डूबने के कारण 11 श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 4 लोगों को आसपास के ग्रामीणों और पुलिस की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। मृतकों की पहचान: जिनके नाम आज़ भी आंसू बहा रहे हैं प्रशासनिक पुष्टि के अनुसार मृतकों की सूची heartbreaking है — रामबेटी (60), सरोजा देवी (58), राजू (30), नरेंद्र (32), पंकज (28), आरती (25), गुड़िया (22), आरव (5), ...

बाराबंकी में छह महीने से खड़ी हैं UPSRTC की इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसें

📰 बाराबंकी बस अड्डे पर छह महीने से खड़ी हैं करोड़ों की इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसें चार्जिंग स्टेशन और संचालन योजना के अभाव में बेकार पड़ी UPSRTC की आठ बसें अनुरीत टाइम्स। बाराबंकी। बाराबंकी। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) द्वारा बाराबंकी को आवंटित की गई 8 नई इलेक्ट्रिक डबल डेकर बसें पिछले 6 महीनों से बिना संचालन के बस अड्डे पर खड़ी हैं। ये बसें खुले मैदान में धूल, मिट्टी, धूप और बारिश का सामना कर रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार, इन बसों को चार्ज करने के लिए अब तक चार्जिंग स्टेशन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई ये बसें आम जनता की सेवा में नहीं आ सकीं। बसों की अत्यधिक ऊंचाई भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। शहर के विभिन्न मार्गों पर ओवरब्रिज, विद्युत लाइनों और पेड़ों की शाखाओं के कारण इन बसों का संचालन मुश्किल बताया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग से अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ये बसें सरकारी योजनाओं की अव्यवस्था और लापरवाही का प्रतीक बनती जा रही हैं।